अंतस में ओज रो संचार करती पोथी - सूरां पूरां री शौर्य गाथावां भाग -1

अंतस में ओज रो संचार करती पोथी - सूरां पूरां री शौर्य गाथावां भाग -1

'सूरां पूरां री शौर्य गाथावां भाग-१' पोथी म्हारै हाथवळू है। सैं सूं पैला म्हूं डिंगळ रसावळ चैनल रा सिरताज आदरजोग दीपसिंह जी भाटी सा रौ अंतस काळजै आभार परगट करती थकी घणै मान खम्मा घणी अरज करूं । आप सगळां मान जोग हेताळूवां नै बतावता थकां घणौ अंजस अर हरख हुय रैयौ है के लारलां कीं दिनां पैली साहित जगत रा चावा ठावा अर लूंठा कवेसर राजस्थानी डिंगळ रा रसावळ आदरजोग दीपसिंह सा भाटी कृत पोथी "सूरां पूरां री गाथावां भाग -१" इण अकिंचण नै डाक रै मारफत मिळी ।

सूरां-पूरां री शौर्य गाथावां (1) - Dingal Rasawal

धिन भाग म्हारा जकौ आदरजोग भाटीजी म्हनै इण जोग समझ सूरां पूरां री गाथावां जैहड़ी लूंठी अर अंजसजोग पोथी भेट सरुप भैजी । पोथी रै मांय आदरजोग रो लिख्यौड़ौ आसीस अर सनेव सरुप कागद ई पराप्त हुयौ ,पोथी रौ कवर पेज ई अंजसजोग अर घणौ रुपाळौ लागौ उण माथै राजस्थान री सैंस्कृति में जलम लैवणियां वां सूरां पूरां रा चितराम बखांण जोग है। पोथी रै पैलै पेज माथै जोधाणै रा हिज हाइनेस बावजी महाराज आदरजोग गजसिंह जी सा रौ सुभकामना संदेस अंजस अर गिरबैजोग है ।

                यूं तो आदर जोग दीपसिंहजी सा लगोलग लारलां कैयी बरसां सूं यूट्यूब चैनल डिंगळ रसावळ अर सोशल मिडिया माथै राजस्थानी साहित रै सिरजण रौ सांवठो प्रचार प्रसार कराय इज रैया है, हरख री बात आ है के अबै आपां नै पोथी रै मुजब ई आपणी राजस्थानी सैंस्कृति अर ऄतिहासिक जाणकारियां इण घणमौली लूंठी अर निकेवळी पोथी सूरां पूरां री गाथावां रै मुजब मिळ जावेला।आदरजोग री इण पोथी रै मांय नै आपणै राजस्थान रै इक्कीस जोगा सूरवीरां री सूरवीरता री गिरबैजोग कहांणियां रौ बातपोस रूप में सिरजण कर आप सरावण जोग काज कीनौ है ।

       "सूरां पूरां री शौर्य गाथावां भग-१, पोथी में विगत रै मुजब आदर जोग पैलौ बखांण "मेवाड़ रा सिरजणहार बप्पा रावळ " रौ करावाड़ियौ है जिण नै बांच रूंगतां ऊभा व्हैग्या। धिन है उण जामणियां नै, जिणां ऄडा सपूतां नै जलम दीनौ अर आं सपूतां आपरा प्रांण तज नै मरजादां नै अखी राख आपरी मां रै दूध नै उजळौ राख्यौ। आदर जोग सौळै आना साची लिख्यौ गीरबेजोग बात है के आखै जुग में भारत रौ इतिहास गरवीलौ है ,भारत रै इतिहास में राजपूताना राजस्थान रौ इतिहास घणौ चावौ अर राजस्थान रै इतिहास में क्षतरी कौम रौ इतिहास घणौ गरवीलौ है।क्षतरी कुळ में चितौड़ रौ इतिहास घणौ ऊजळौ । सूरां पूरां रौ बखांण करता थका आदरजोग दीपसिंह भाटी सा घणा सरावण जोग सांगोपांग कैयी जूनां दूहा मांड्या है –

 

परगट दीसै अचपळा , जोधारां रा जाम ।
खड्ग उठावै खेल में ,गणवै अरियां गाम ।।
उरा थरिंदा आंपणा ,सीस धुणीन्दां साह।
रूप रखिंदां राण रा , वाह गिरिन्दां वाह।।

                                     (बप्पा रावळ, पेज संख्या 10)

       ख्यातनाम डिंगळ कवि दीपसिंह सा री लेखणी रौ बखांण आ अकिंचण आखरा माय नी कर सकै है। जगै जगै माथै डिंगळ रै छंदां रो तड़को पाठक नै आरंभ सूं अंत लग बांधै राखै। मायड़ भासा री सिरै विधा 'बातपोस' नै जीवती करवा में भाटी सा रो जोगदान साहित रे मांय सौनीले आखरां में मांड्यो जावैला।

बात री मठोठ, ठसक अर सरुआत घणी मनमोहणी। नवी तकनीक मुजब पोथी री खास बात आ है के हरैक शौर्य गाथा रै सरू में उण बात रो क्यू आर कोड दीधोड़ो है जिणनै स्कैन कर आप उण गौरव गाथा रो वीडीयो पण देख सकौ। भाटीजी रो बोलवा रो लैहजो, धारा प्रवाह, मायड़ भासा रा अटीपा आखर अर मिसरी जैड़ो मीठो कंठ पाठक अर दरसकां नै घणो सुहावै-

              "तो रामजी थांनै भला दिन दै, माळवा री धरम धजाळी धरती माथै वि. सं. 1145 रै लगेटगै नामी राजा जगदेव परमार रो सांगोपांग राज। ऐ ओई इज जगदेव परमार हो जिण आपरे सीस रो दान कीधो। जगदेव परमार रै ऊजळै कुळ माथै निजर दौड़ावां तो भगती अर शगती रो हबोळा खावतो दरिया देखीजै।"

                                       (सीस दानी जगदेव परमार, पेज नं 29)

             आपसा री लेखणी रळियावणा थळी हंदा आखर अर "सूरां पूरां री शौर्य गाथावां" जैहड़ी पोथी रौ जितरौ बखांण करां उतौ ई कम पड़ जावै। सगळां गुणी पाठकां सूं घणै मान अरज करूं आप ई सूरां पूरां री गाथावां जैहड़ी लूंठी पोथी बांचौ अर राजस्थान रै इक्कीस जोगा सूर वीरां री वीरता री ऐतिहासिक महताऊ जाणकारी हासल करावौ सा ।

            धिन है उणा सूरां नै जकौ सीस कट्यां रै पछै ई मातभोम अर मरजादां री रिछ्या खातर धड सूं लडतौड़ां थका अजर अमर हुयगां । भाटीजी सूरां पूरां री रण रम्मत रो ओजस्वी बाण में रूंगता ऊभा व्है जैड़ो बखांण करता थका डिंगळ रे ऐक त्रिभंगी छंद रे मारफत जीवतो जागतो चितराम उकेरै-

भाटी जुध भिड़िया,असुर उखड़िया,तुर्क तपड़िया,तड़बड़िया।
खांडा खड़खड़िया, माथा पड़िया ,रेत रगड़िया, रड़गड़िया।
पठाण पछड़िया, रण रिपु रड़िया ,खून खुबड़िया खेंगालो।
जादम जोरालो ,अद्भुत आलो, सूर छटालो, छतरालो।
                               जीय भळहळ आलौ भालाळो।।    

                                     (छतरपती वीर आल्हाजी, पेज संख्या 102)   

 

 भाटी सा री लहरावती लेखणी पाठक नै कदै सौनीले अतीत री सैर करावै तो कदै रणभोम रे मांय चमकती सूरां री समसीरां रा दरसण करावै तो कदै वीररस अर सिणगार रस रा रैला दैती निगै आवै-

             "वाह सा, रणभोम में वीर कल्ला ऐसौ रीठक मचायौ के हजारों मुगलां नै मूळी-गाजर सूं काट दीधा। छैवट कल्ला रो सीस कटग्यौ। बिना शीश एक पौहर लग वीर कल्ला रै कबंध मुगलां री सेना में ऐसी तबाही मचाई कै जमराजजी खुद हाकबाक होयग्या। कल्ला रो सामीभगत घोड़ो कबंध ले हाडी राणी री चनण चिता कनै पूगौ। हाडी राणी आरती उतारती बोली, " हे म्हारै भव भव रा भरतार! भलां पधार्या म्हारा नाथ ! पण ऐड़ौ कांई भौळो सुभाव जको आपरौ माथौ ई रणभोम में बिसारै आया।" 

                                        (वीर कल्लो रायमलोत, पेज संख्या 117 )

सूरां पूरां री शौर्य गाथावां रे मांय काळजो काढै जैड़े आपरै ऊकळते अरमानां नै आदरजोग दीपसिंह जी इण पोथी में संजोया है। पोथी रो कला पख घणो सांवठो है। छंद, अलंकार, वयण सगाई, ओपमा बिंब, ओखांणा, रूपक, भासायी रचनाव आद घणा सरावण जोग अर पोथी रै भाव पख री कांईं बातां करणी !! इण पोथी रे मांय सगळे रसां रो सांगोपांग मेळ लखावै। पोथी बाचतां बाचतां पाठक रै सूरापो चढ़ै।

                 म्हनै पूरो पतियारो है के ओ पोथी साहित समंदर रै मांय मोती ज्यूं थापित व्हैला। मायड़ भासा रै खजानै रो अमोलो रतन अर सुधि पाठकां रो कंठहार बणैला। ऐकर फैरूं अंतस री उण्डाई सूं डिंगळ कवि अर साहित मणि आदरजोग दीपसिंह जी भाटी 'दीप' नै इण कालजयी कृति री मौकळी बधाईयां अर शुभकामनावां।

 

समीक्षिका-
श्रीमती निर्मला राठौड़
पदम निवास, पावटा बी. रोड़
जोधपुर

लेखक- दीपसिंह भाटी 'दीप'
संस्करण : 2020 पेज‌ - 143 , मोल -400रिपिया
प्रकाशक- रॉयल पब्लिकेशन 
18 शक्ति कॉलोनी,गली नं 2 लोकों शेड रोड , 
रातानाडा, जोधपुर 342011 ( राज.)

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